आधुनिक काल में शासन सत्ता के पीछे वास्तविक शक्ति राजनीतिक दल हैं। वे शासन रूपी गाड़ी को चलाने के लिए ईंधन (fuel) का कार्य करते हैं। वे समाज के राजनीतिक एवं आर्थिक पहलुओं पर इस प्रकार छा गये हैं कि उन्हें अदृश्य सरकार (Invisible Government) कहा जाता है। भारत तथा इंगलैण्ड की अपेक्षा सोवियत रूस में साम्यवादी दल का बहुत अधिक महत्त्व है। उन्हें ही देश का "शासक" (Governor) कहा गया है। दल ही सोवियत संघ के प्रशासन का पथप्रदर्शन एवं निर्देशन करता है। संविधान की धारा 120 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि- "समाजवादी व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और उसे विकसित करने के लिए किये जाने वाले संघर्ष में श्रमजीवी जनता का मार्गदर्शन और श्रमजीवी जनता की सभी सार्वजनिक और राजकीय संस्थाओं का मूल केन्द्र है।
साम्यवादी दल के महत्त्व को समझने के लिए उसके कार्यों पर विचार करना आवश्यक है। 1952 ई. के दल नियमों के संशोधित प्रारूप में कहा गया कि- "वर्तमान काल में सोवियत संघ में साम्यवादी दल के मुख्य कर्तव्य है- साम्यवादी समाज का निर्माण, समाज के आजीविका तथा सांस्कृतिक स्तर को निरन्तर ऊँचा उठाना, रूसियों को अन्तर्राष्ट्रीय तथा सभी देशों के मजदूरों से भ्रातृ-सम्बन्ध स्थापना की शिक्षा देना और दुश्मन से सोवियत संघ की सुरक्षा करना।”
संक्षेप में सोवियत रूस के साम्यवादी दल के कार्यों का विस्तृत विवरण इस प्रकार है-
1917 ई. के बोल्शेविक क्रांति के पूर्व साम्यवादी दल का प्रमुख कार्य था जारशाही के विरुद्ध देश में क्रांति लाना। 1917 ई. की सफल क्रांति के पश्चात् साम्यवादी दल का प्रमुख कार्य हो गया-आन्तरिक एवं वाह्य शत्रुओं से क्रांति की रक्षा करना । देशद्रोहियों एवं विदेशी पूँजीवादी देशों के विरुद्ध रूस के साम्यवादी दल ने सजग “प्रहरी” के रूप में कार्य किया। अभी भी साम्यवादी दल का प्रमुख कार्य है-समाजवादी रूस की आन्तरिक एवं वाह्य शत्रुओं से रक्षा करना।
साम्यवादी दल ने रूस को आगे बढ़ाने में तथा समाजवाद के निर्माण में जनता के समक्ष कठिन परिश्रम एवं अद्भुत त्याग का अपूर्व उदाहरण प्रस्तुत किया। इस अर्थ में वे जनता के आदर्श एवं प्रेरक हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने सोवियत जनता को मार्क्सवाद तथा लेनिनवाद की शिक्षा भी दी। मार्क्स के आदर्शों का प्रचार दल का प्रमुख कार्य है।
साम्यवादी दल ही सोवियत जनता का एकमात्र राजनीतिक संगठन है तथा अन्य संगठनों का संचालन एवं निर्देशन करता है। अर्थात् दल सभी राजकीय या सार्वजनिक संस्थाओं का मूल केन्द्र है।
रूसी साम्यवादी दल समाजवादी व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा उसे विकसित करने के लिए किये जाने वाले संघर्ष में श्रमजीवी जनता का मार्ग-दर्शक है। साम्यवादी सर्वहारा वर्ग के अधिनायकत्व की स्थापना चाहता है।
साम्यवादी दल का एक प्रमुख कार्य सोवियत जनता को लेनिन एवं मार्क्स के सिद्धान्तों की शिक्षा देना है। इसके लिए वह सभी उपलब्ध साधनों का प्रयोग करता है। इस उद्देश्य से संगीत, कला, साहित्य एवं विज्ञान को इस प्रकार नियमित किया जाता है कि जनता में मार्क्स के सिद्धान्तों के प्रति विश्वास हो तथा साम्यवादी प्रवृत्ति भावना का विकास हो ।
रूसी साम्यवादी दल जनता तथा नेता के बीच में एक कड़ी का कार्य करता है। दल के माध्यम से नेतागण अपने कार्यों का विवरण जनता के समक्ष प्रस्तुत करते हैं। दल सरकार की नीतियों तथा कार्यों के विषय में जनता को सूचना देता है तथा उसकी स्पष्ट व्याख्या जनता के सामने रखता है। इस उद्देश्य से दल समाचार पत्र, समाचार एजेंसियों, रेडियो, साहित्य आदि को दल अपने नियन्त्रण में रखता है। तथा इसके माध्यम से समाचारों एवं सूचनाओं का मनचाहा रूप जनता के सामने रखता है।
साम्यवादी दल केवल सरकारी नीतियों एवं कार्यों की सूचना ही जनता को नहीं देता वरन् जनता की इच्छा तथा प्रतिक्रियाओं की सूचना भी सरकार और दल के नेताओं को देता है। सरकार को उसकी नीति तथा कार्यों के प्रति जनता का दृष्टिकोण एवं प्रतिक्रिया साम्यवादी दल के माध्यम से ही प्राप्त होता है।
रूस के साम्यवादी दल को कुछ अन्तर्राष्ट्रीय कार्य भी पड़ते हैं। रूसी साम्यवादी दल का एक उद्देश्य दूसरे देशों से भी पूँजीवाद का विनाश एवं साम्यवाद की स्थापना है। इसलिए अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों के माध्यम से रूसी साम्यवादी दल अन्य देशों के साम्यवादी दलों का पथ प्रदर्शन करता है तथा उन्हें नियंत्रित भी करता है।
साम्यवादी दल के महत्ता का सबसे प्रमुख कारण यह है कि अपने स्थिति के कारण यह रूस का वास्तविक शासक बन गया है। अन्य देशों के दलों की भाँति यह सरकार का निर्माणकर्त्ता, पालनकर्त्ता तथा संचालक तो है ही, इसके अतिरिक्त शासन से वह इतना घुल-मिल गया है कि दल तथा सरकार को अलग-अलग करना मुश्किल है;
दल-शासन पर इस तरह छा गया है कि वह देश का वास्तविक शासक बन गया है। शासन के विभिन्न अंग दल की नीतियों के कार्यान्वयन के साधन मात्र हैं। सिद्धान्त रूप में सरकार कानून बनाती है, अध्यादेश जारी करती है, सेना का संगठन करती है तथा वैदेशिक नीति का संचालन आदि कार्य करती है किन्तु व्यावहारिक रूप में ये सभी कार्य दल द्वारा किये जाते हैं।
किसी भी विषय में दल का निर्णय ही अन्तिम होता है। सरकार के विभिन्न अंग केवल "रबर स्टाम्प मात्र है। अर्थात् सरकार केवल दल के निर्णयों को लागू करती है। विधानपालिका, कार्यपालिक तथा न्यायपालिका दल के सहायक अंग हैं। वस्तुतः दल ही सरकार है और सर्वहारा अधिनायकत्व दल का (Dictatorship of the Party) है
दल का महासचिव ही देश का वास्तविक प्रधानमंत्री है और प्रधानमंत्री उसके हाथों में एक खिलौना मात्र है। इसलिए प्रायः रूस में जो व्यक्ति प्रधानमंत्री होता है वही दल का महासचिव भी होता है। जो प्रधानमंत्री दल का महासचिव नहीं हुआ उसे अन्त में पदत्याग करना पड़ा। इससे भी दल की महत्ता सिद्ध होती है।
सोवियत साम्यवादी दल की निम्नलिखित प्रमुख विशेषताएँ हैं :
पूँजीवादी देशों के विपरीत सोवियत रूस में एक दल की परम्परा है। पूँजीवादी देश के विभिन्न द्रल समाज के विभिन्न वर्गों को दर्शाते हैं। किन्तु सोवियत रूस में एकमात्र वर्ग है-सर्वहारा वर्ग । अतः सोवियत रूस में सिर्फ एक दल है - साम्यवादी दल जो सर्वहारा वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है। किसी अन्य दल या संगठन के लिए वहाँ के संविधान में कोई स्थान नहीं है।
रूसी साम्यवादी दल निश्चित सिद्धान्तों पर आधारित है तथा इसके निश्चित उद्देश्य भी हैं। यह दल लेनिन तथा मार्क्सवाद के सिद्धान्तों पर चलते हुए सर्वहारा वर्ग के अधिनायकत्व की स्थापना तथा उसको सुदृढ़ बनाने एवं समाजवादी व्यवस्था को स्थापित करने तथा सुदृढ़ बनाने के लिए कृतसंकल्प है।
साम्यवादी दल अपनी स्थिति के कारण रूसी शासन में सर्वोच्च है। यह सोवियत समाज का अग्रणी एवं पथ प्रदर्शक है। देश का वास्तविक शासक है तथा प्रशासन के सभी अंगों पर इसका पूर्ण नियंत्रण है।
"मोनोलिथ" (Monolith) का अर्थ है, एक ही ठोस पत्थर का बना हुआ खम्भा। सोवियत साम्यवादी दल को 'मोनोलिथिक' दल कहा जाता है। 'यह पूर्णतः केन्द्रित, संगठित एवं कठोरतम अनुशासित दल है।
साम्यवादी दल एक सीमित सदस्यता वाला संगठन है। इस दल की सदस्यता प्राप्त करना एक कठिन कार्य है। इस दल के विधान के अनुसार दल के सदस्यों को कुछ निश्चित अधिकार प्रदान किये गये हैं। इसी सूची की परिधि में वे बँधे रहते हैं।
रूसी साम्यवादी दल का गठन जनतांत्रिक केन्द्रवाद (Democratic Centralism) के सिद्धान्त के आधार पर किया गया है। इसके अनुसार प्रत्येक निम्न स्तर की दल-संस्था अपने से उच्च स्तर की दल-संस्था का निर्वाचन करती है, लेकिन प्रत्येक निम्न संगठन अपने से उच्च संगठन के अधीन होता है और उसके आदेशानुसार ही कोई कार्य करता है।
सामाजिक संगठन की दृष्टि से रूसी दल को पूर्ण प्रतिनिधि नहीं कहा जा सकता है। पहले दल में श्रमिकों की संख्या ज्यादा थी। आज उनकी संख्या घट रही है और बुद्धिजीवियों की संख्या बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों की अपेक्षा शहरी सोवियत साम्यवादी दल में अधिक संख्या में हैं। इस प्रकार सोवियत साम्यवादी दल को पूर्ण प्रतिनिधिक संस्था नहीं कहा जा सकता है।
निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि रूस में साम्यवादी दल ही देश का “वास्तविक शासक" (Real Governor) है। दल तथा सरकार में विभेद करना असम्भव है। फेनसाड (Fainsod) ने ठीक ही कहा है कि- "दल सरकार के अन्दर एक सरकार है और सोवियत संघ में शक्ति का वास्तविक केन्द्र है।" उसी प्रकार साम्यवादी दल "स्पार्क प्लग" (Spark Plug ) या शक्ति का स्रोत है। संक्षेप में सोवियत समाज के राजनीतिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक जीवन के प्रत्येक पहलू पर दल का एकच्छत्र आधिपत्य है।
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