द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान की पराजय के कारण

दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में जापान की लगातार होने वाली जीत से ब्रिटेन और अमेरिका काफी परेशान हो चूके थे 14 अगस्त 1941 को अमेरिकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट तथा ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर विंस्टन चर्चिल ने अटलांटिक चार्टर पर हस्ताक्षर किए कुछ समय से दोनों देश चीन की आर्थिक और सैनिक सहायता कर रहे थे ब्रिटेन ने अमेरिका के प्रत्येक निर्णय को समर्थन देने की घोषणा कर दी थी जापान का मुकाबला करने के लिए अमेरिका, इंग्लैंड और हॉलैंड के प्रदेश में समस्त जापानी वहाँ के प्रदेशों में इस्तेमाल की गई समस्या जापानी पूंजी को जब्त कर लिया गया है इस तरह इस कार्य से जापान की अर्थव्यवस्था पर काफी प्रभाव पड़ा इस घटना के कारण आर्थिक युद्ध भी आरंभ हो गया तथा ईस्ट इंडीज से कई महत्वपूर्ण वस्तुओं का आना जाना बंद हो गया।


1942 के मध्य से युद्ध की दिशा में परिवर्तन होने लगा तीन से छे जून के बीच प्रशांत महासागर के मिड डे द्वीप की लड़ाई में पहली बार जापान को बड़ी हार का सामना करना पड़ा इस घटना से मीडिया और संभव हवाई द्वीपों पर अधिकार का जापानी मनसूबा खत्म हो गया


1943 से ही प्रशांत महासागर के क्षेत्र में व्यापारी उन्हें पीछे हटना आरंभ कर दिया मित्र राष्ट्रों ने जापान के सात प्रति रक्षात्मक युद्ध के स्थान पर इसके विरुद्ध आक्रमणात्मक युद्ध की नीती अपनाने न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के सैनिक अड्डों से मित्र राष्ट्रों की सेनाएं लगातार जापानी संपर्क लाइन और उनकी सेनाओं पर हमला करते रहे 1943 के मध्य तक जापान युद्ध में काफी थक चुका था उसका साथी जर्मनी, यूरोप में रूसी मोर्चे से पीछे हटने लगा था तथा उत्तरी अमेरिका के युद्ध में मित्र राष्ट्रों की जीत हो चुकी थी


11-24 अगस्त 1943 तक अमेरिका, ब्रिटेन और चीन के राष्ट्रध्यक्षों ने राष्ट्राध्यक्ष कनाडा से मिले और वहाँ यह तय किया गया कि जापान पर हमला करने के लिए चीन को अधिक से अधिक सहायता दी जाए सोवियत संघ से भी इस युद्ध में सहयोग की मांग की गई इस घटना के पश्चात 19-30 अक्टूबर को ब्रिटेन सोवियत संघ तथा अमेरिका के विदेश मंत्रियों का एक और सम्मेलन मास्को में हुआ जहाँ फासिस्ट वाद की समाप्ति और युद्ध अपराधियों के विरुद्ध न्यायिक कार्यवाही करने का निश्चय किया गया पूर्वी एशिया के युद्ध की घटनाओं को के लिए पुन काहिरा में अमेरिका, ब्रिटेन और चीन के बीच वार्ता हुई यह निश्चय किया गया है कि युद्ध तब तक जारी रखा जाए जब तक जापान बिना शर्त आत्मसमर्पण के लिए तैयार नहीं हो जाता ।


उसके पश्चात चीन का समस्त इलाका उसे वापस लौटा दिया जाएगा और कोरिया को आजाद कर दिया जाएगा इस घटना के पश्चात इन तीनों देशों के नेताओं ने तेहरान में स्टालिन से भी बातचीत की सोवियत संघ ने भी जापान के विरुद्ध युद्ध में उतरने का वचन दिया ये तय किया गया कि कोरिया को वर्ष के लिए संकेत संरक्षण में रखा जाएगा दाय रन के बंदरगाह को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खोल दिया जाएगा और कुरील तथा सखालिन द्वीप जरू उसको दे दिया जाएगा आपसी सहयोग स्थापित करने से पूर्व ही मित्र राष्ट्र अपनी लड़ाइयों को जीतने लगे थे के मध्य में हुए बड़े संघर्ष में ऑस्ट्रेलियाई और अमेरिकी सेनाओं ने मिलकर दक्षिण पश्चिम प्रशांत महासागर के मुख्य सैनिक अड्डे को नष्ट कर दिया पश्चिम की ओर अमेरिकी बमवर्षक विमानों ने कैरोलिन इसकी जापानी अड्डे पर हमला किया और दक्षिण पूर्व एशिया के साथ जापान की रसीद और संचार व्यवस्था को नष्ट करने का प्रयास किया


मुख्य भूमि के साथ साथ जापान के तटीय नगरों पर भी समुद्री जहाजों से गोलीबारी हो रही थी युद्ध के अंतिम महीने में अमेरिकी और ब्रिटिश विमानों ने लगभग तीन हज़ार जापानी विमानों को नष्ट कर दिया तथा सोलह जहाज डूबा दिया गया यह फिर उन्हें क्षतिग्रस्त कर दिया गया एक अगस्त तक जापानी नौसेना और वायुसेना की शक्ति नष्ट हो चुकी थी वहाँ के रेल मार्ग टूट फूट चूके थे कोयले की कमी हो गयी, तेल की समाप्त होने लगा और गैर सैनिक सामान्य का निर्माण करना बंद होगा इसके बावजूद जापानियों का साहस कम नहीं हुआ और वे अपनी समर्पण के लिए तैयार नहीं हुए 1945 के मध्य तक जापान की सैनिक शक्ति पूरी तरह से नष्ट हो, चुकी थी यूरोप में जर्मनी आत्मसमर्पण कर चुका था और जापान अकेला हो चुका था उसे कई चेतावनियां दी गई पर वह आत्मसमर्पण के लिए तैयार नहीं हुआ


जापानी प्रतिरोध और द्वितीय युद्ध को अंतिम रूप से समाप्त करने के उद्देश्य अमेरिका ने 6 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा नगर पर पहली बार परमाणु बम का प्रयोग किया इस बमबारी से नगर और उसके आसपास के क्षेत्रों में लगभग साठ, हज़ार लोग मारे गए और दो दिन बाद दूसरा परमाणु बम नागासाकी पर गिराया गया इसमें चालीस हज़ार नागरिको की मृत्यु हो गई दोनों नगरों का पूरी तरह से विनाश हो गया इस स्थिती में जापान के समक्ष आत्मसमर्पण के सिवा कोई रास्ता नहीं रहा

9-10 अगस्त को व्यापन के सम्राट की अध्यक्षता में युद्ध परिषद की बैठक हुई युद्धमंत्री तथा कुछ लोगों को छोड़कर अन्य सभी लोग आत्मसमर्पण करने के पक्ष में थे कतर जापान ने आत्मसमर्पण की मांग को कुछ शर्तों के साथ स्वीकार कर ली ये सरते सम्राट की शक्ति, अधिकार और प्रतिष्ठा से संबंधित थी मित्र राष्ट्रों ने इसे अस्वीकृत कर दिया चौदह अगस्त को युद्ध परिषद की दूसरी बैठक हुई युद्धमंत्री तथा दोनों सेनाध्यक्षों के विरोध के बावजूद परिषद के अन्य सदस्यों ने युद्ध बंद करने का समर्थन किया और बिना शर्त आत्मसमर्पण की बात स्वीकार कर ली सम्राट ने अपनी प्रजा को सूचित किया कि जापान में आत्मसमर्पण कर दिया है 17 अगस्त को नयी सरकार बनायी गयी, इसमें आत्मसमर्पण के कार्य को पूरा करने की जिम्मेदारी दी गई 30 अगस्त 1945 को मित्र राष्ट्रों का सर्वोच्च सेनापति जनरल मैकऑर्थर जापान पहुंचा तथा आत्मसमर्पण की अंतिम कार्रवाई टोंका में अमेरिकी युद्धपोत पर संपन्न हुई प्रकार जापान के साम्राज्यवादी जीवन का अंत होगा