1911 ई. की चीन की क्रांति की कारण और परिणाम

1899 ई. में हुए बॉक्सर विद्रोह भले असफल हो गया था लेकिन इस विद्रोह ने 1911 ई. में हुई चीन की क्रांति की नीव खड़ी कर दी थी. जनता में कमजोर मांचू सरकार के खिलाफ लगातार असंतोष बढ़ता जा रहा था. लोग इस कमजोर चीनी सरकार को उखाड़ फेकने के किये अमादा थे. अत: चीन में क्रांति की शुरुआत हुई.

चीन हुई 1911 ई. की क्रांति के प्रमुख कारण

चीन में विदेशी हस्तक्षेप का बढ़ना

चीन में बॉक्सर विद्रोह के बाद इंग्लॅण्ड, अमेरिका, फ्रांस, रूस और जापान जैसे देशों का हस्तक्षेप बहुत बाद गया था. इन देशों ने चीन के साथ संधि करके चीन पर अपना प्रभुत्व स्तापित कर लिया था. पश्चिमी और यूरपीय देशों ने चीन में जमकर शोषण करना आरम्भ कर दिया. चीन के महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्रों पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया. चीन की सरकार नाममात्र की सरकार थी. चीन के लगभग सभी फैसले विदेशी ताकतें ही करती थी. इस सबको देख कर चीनी जनता में असंतोष की भावना बढ़ने लगी. वे तत्कालीन चीनी सरकार और इन विदेशी ताकतों को देश से बहार निकलना चाहते थे.

मांचू सरकार के प्रति घृणा

मांचु सरकार विदेशी ताकतों की मदद से चल रही थी. देश में होने वाले विद्रोहों को कुचलने के लिए भी विदेशी ताकतों का सहारा लेती थी. देश में विदेशी ताकतों की मनमानी का विरोध भी नहीं कर पाती थी. ऐसे में मांचू सरकार की कमजोरियों का पता चीन की जनता को पता चल गया. उनको पता था कि ऐसी कमजोर सरकार देश की रक्षा नहीं कर सकती थी. वह विदेशी ताकतों की कठपुतली बन गई थी. इसीलिए चीनी जनता में मांचू सरकार के प्रति घृणा बढ़ती चली गई.

जनसँख्या में वृद्धि

20 वीं शताब्दी की शुरुआत तक चीन की जनसँख्या में काफी तेजी से वृद्धि हुई. 1911 ई तक चीन की आबादी में लगभग 5 करोड़ की वृद्धि हुई. लेकिन चीन की सरकार ने जनसँख्या वृद्धि के अनुपात में न कृषि उत्पादन को बढ़ाया और न आवश्यक संसाधनों को बढ़ाने की कोशिश की. नतीजतन देश में खाने- पीने की वस्तुओं से लेकर अन्य दैनिक जरुरत की वस्तुओं की कमी हो गई. इस वजह से भुखमरी, भ्रष्टाचार, गरीबी जैसे समस्याऐं पैदा होने लगी. लोग अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए लूटपाट भी करने लगे थे. सरकार इन सब से निपटने में नाकाम रही. इसीलिए लोगों म असंतोष बढ़ता चला गया.

प्राकृतिक आपदाएं

1910-11 में चीन की कई नदियों में भीषण बाढ़ आई. इतिहासकारों में मुताबिक ये पिछले 40 वर्षों की सबसे विकराल और भयानक बाढ़ थी. इस बाढ़ से जान माल की भीषण क्षति हुई. लाखों लोग बेघर हो गए. मांचू सरकार इस गंभीर संकट का सामना न कर सका. चीनी सरकार के द्रारा इस संकट के प्रति उपेक्षापूर्ण नीति ने देश में भीषण असंतोष को जन्म दिया.

प्रवासी मजदूर वर्ग का प्रभाव

चीन में बढ़ती आर्थिक संकट के कारण चीन के लोगों को अन्य देशों में पलायन करने पर मजबूर कर दिया. बड़ी संख्या में चीनी अमेरिका, फिलीपींस, कनाडा और सिंगापुर जैसे देशों की ओर अपनी आजीविका की खोज में चले गए. ऐसे प्रवासी चीनी मजदूरों की संख्या लगभग 25 लाख के आसपास थी. इन लोगों ने वहां से धन भेजना शुरू कर दिया. वे जब भी चीन आते थे वे उस देश की आर्थिक सम्पन्नता की बखान करते थे. ऐसे में चीन के मजदूर वर्ग के लोगों के मन में भी क्रांति की भावना का विकास होता गया.

बौद्धिक जागरण

1905 में चीन में प्राचीन शिक्षा पद्धति का अंत हुआ. इसके बाद चीन के छात्रों को आधुनिक शिक्षा के लिए विदेश जाने को प्रेरित हुए. चीन की ईसाई मिशनरी भी प्रतिभावान छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए विदेश भेजती थी. चीन के छात्रों पर वहां की शिक्षा, शासन पद्धति, और रहन सहन का काफी प्रभाव पड़ा. उन पर खासकर पश्चिमी सभ्यता के समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के सिद्धांतों का गहरा प्रभाव पड़ा.
अत: चीनी विद्यार्थियों ने चीन की और पश्चिमी देशों की स्थिति का तुलनात्मक स्थिति का अध्ययन करना आरम्भ कर दिया.

तात्कालीन कारण

1909 और 1911 के बीच पीकिंग के केंद्रीय सरकार के द्वाराअपनाई गई रेलवे निर्माण नीति और हॉकों की घटना इस विद्रोह की तात्कालीन कारण बनी. रेलवे लाइन की निर्माण विदेशी फर्मों अनुबंध किया गया थे. ये विदेशी फर्म ही इन रेलवे लाइनों का निर्माण कर रही थी. इस बात का विरोध करने के लिए चीनी नागरिक आंदोलन करना शुरू कर दिए थे. आंदोलनकारियों को सरकार गिरफ्तार करने लगी. आंदोलन जब चरम पर था. उसी समय 10 अक्टूबर 1911 को हॉकों में स्थित रुसी बस्ती के एक घर में बम विस्फोट हो गया. ये घर क्रांतिकारियों के बम निर्माण अड्डा था. इस विस्फोट के बाद रुसी अधिकारीयों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बहुत से क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद क्रांतिकारियों ने वायसराय के दफ्तर में आग लगा दी और क्रांति की आग भड़क गई.

1911 की चीनी क्रांति की परिणाम

चीन की 1911 की क्रांति के फलस्वरूप चीन के अन्तिम राजवंश (चिंग राजवंश) की समाप्ति हुई और चीनी गणतंत्र बना। यह एक बहुत बड़ी घटना थी। मंचू लोगों का शासन चीन पर पिछले तीन सौ वर्षों से चला आ रहा था जिसका अंत हो गया। बीसवीं शताब्दी में चीन एशिया का प्रथम देश था, जहाँ गणतांत्रिक सरकार की स्थापना हुई। चीन के क्रांतिकारियों ने फ्रांसवालों का अनुकरण किया और राजतंत्र का सदा के लिए अंत कर दिया।