पूँजीवाद की विशेषता तथा उदय के कारण

वैसी अर्थव्यवस्था जिसमें उत्पादन के सभी साधनों पर निजी व्यक्तियों का अधिकार और नियंत्रण होता है। तथा सभी आर्थिक क्रियाएं निजी हित एवं लाभ के लिए किया जाता है। जिसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है उसे पूँजीवाद अर्थव्यवस्था कहते हैं

पूँजीवाद में तीन चीजें शामिल होते हैं। श्रम ( वेतन के आधार पर काम करना ) साधनों का निजी स्वामित्व ( जैसे कृषि भूमि मशीनें आदि ) विनिमय तथा लाभ कमाने के लिए उत्पादन के साधनों के स्वामी जिसे बुर्जुआ या पूँजीपति कहा जाता है। बेन्हम के अनुसार- "पूँजीवादी अर्थव्यवस्था तानाशाही की प्रतिरोधी है। उत्पादन के क्षेत्र में कोई केन्द्रीय योजना नहीं होती। राज्य के द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को छोड़कर प्रत्योक व्यक्ति अपनी इच्छा के अनुसार कार्य करने को स्वतंत्र होता हैं।"

डॉ भारतन कुमारप्पा ने अपनी पुस्तक "Capitalism Socialism and Villagism" में पूँजीवाद को प्रभावित करते हुए लिखा है- यह एक आर्थिक व्यवस्था है जिसमें वस्तुओं का उत्पादन व वितरण व्यक्तिगत इकाई या व्यक्तिगत के समूह द्वारा किया जाता है ये व्यक्ति अपने संचित धन का प्रयोग और आर्थिक धन का संचय के लिए करते हैं। इस प्रकार पूँजीवाद के लिए दो तत्व महत्वपूर्ण है निजी पूंजी एवं निजी लाभ।

पूँजीवाद की विशेषता

निजी स्वामित्व

पूँजीवादी व्यवस्था में उत्पादन के साधनों अर्थात भूमि, पूंजी आदि पर निजी स्वामित्व होता है। व्यक्ति अपने इच्छा और आवश्यकता के अनुसार अपना उद्यम स्थापित कर सकता है। उसकी प्रबंधकीय व्यवस्था भी वह स्वयं करता है। वह निजी संस्थाओं या व्यवसायों को संचालित और नियंत्रित कर सकता हैं।

उद्यम की स्वतंत्रता

व्यक्ति अपनी इच्छा के अनुसार कोई भी उद्यम चुन सकता है। वह जब चाहे अपना उद्यम स्थापित कर सकता है। और अकेला भी कोई कार्य कर सकता है। उसे किसी तरह का कोई बंधन नहीं होता है।

उपभोक्ता की पसंद

पूँजीवादी व्यवस्था में उपभोक्ता की पसंद पर ध्यान रखा जाता है क्योंकि उपभोक्ता को जीस चीज़ की मांग अधिक होती है उसकी कीमतें अधिक होता है। और अगर चीजें की मांग कम होती है तो इस वस्तुओं की कीमतें गिर जाती है। जिससे काफी हानि होती है और इसी कारण उपभोक्ता के पसंद पर ध्यान रखा जाता है।

प्रतिस्पर्धा

प्रतिस्पर्धा भी पूँजीवादी व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण विशेषता है क्योंकि पूँजीवादी का मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना है। इसमें लोग अपने वस्तुओं के गुणवत्ता को विज्ञापन आदि द्वारा लोगों को बताते हैं ताकि उनकी सामान्य (वस्तु) को लोग अधिक पसंद करें।

बाज़ार

पूँजीवाद में बाजार की स्वतंत्रता होती है, वे अपनी वस्तुओं का कीमतें स्वय निधन करते हैं। वस्तुओं की बढ़ोतरी होने पर कभी-कभी ये मुल्क कम भी कर सकते हैं। क्योंकि इन सभी पर इनका निजी अधिकार होता हैं।

पूँजीवाद के उदय के कारण

पूँजीवाद के उदय के निम्नलिखित कारण है-

पुनर्जागरण

पूँजीवाद के उदय में पुनर्जागरण का महत्वपूर्ण योगदान है। पुनर्जागरण ने लोगों को तर्कशील एवं भौतिकवादी बना दिया था और मानवतावाद को बल मिला। अब ये लोगों परलोक को सुखी बनाने की बजाय वर्तमान जीवन को सुखी एवं आरामदायक बनाने में रुचि लेने लगे। धन का संग्रह करना शुरू किया, लोगों में धन कमाने और अपनी जीवन को सुखी बनाने की लालसा बड़ी। जिससे व्यापार-वाणिज्य का विकास हुआ इस उन्नति एवं समृद्धि की भावना ने पूँजीवाद को प्रोत्साहित किया।

धर्म सुधार आंदोलन

धर्म सुधार आंदोलन आधुनिक यूरोप की प्रथम सामाजिक राजनीतिक क्रांति थी, जिसने यूरोपीय देशों की आर्थिक व्यवस्था को प्रभावित किया। कैथोलिक चर्च का मुख्य उद्देश्य मुनाफा कमाना, ब्याज पर धन उधार देना आदि था। इस आंदोलन के प्रमुख नेता मार्टिन लूथर ने लोगों को उपदेश दिया कि जो लोग धन नहीं कमाते वे ईश्वर की सेवा नहीं करते इस बात को लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ा क्योंकि लोग इस समय आस्था में विश्वास करते थे। जिससे लोगों ने व्यापार-वाणिज्य अधिक रुचि लेना शुरू की। प्रोटेस्टेंट को मानने वाले लोग कैथोलिक चर्च के बधंनो की परवाह ना करके व्यापार एवं उद्योग को अपनाना प्रारंभ किया जिसे पूँजीवाद का विकास हुआ।

राष्ट्रीय राज्यों का उत्थान

मध्यकालीन सामंति व्यवस्था के कारण मध्यम वर्ग एवं व्यापारी वर्ग के सहयोग से कई शासकों ने सामंतों की शक्ति को दुर्बल करके शक्तिशाली राष्ट्रीय स्थापित करने के प्रयास किया। 16 वीं - 18 वीं सदी के बीच अनेक शक्तिशाली निरंकुश राज्य स्थापित हुए। इन शासकों ने अपने-अपने देश के व्यापार-वाणिज्य के विकास, धान दौलत में वृद्धि के लिए अनेक प्रयास किए, जिससे पूँजीवाद का विकास हुआ।

भौगोलिक खोजें

15 वीं तथा 16 वीं शताब्दियों में यूरोपीय देशों के नाविकों के साहसपुर्ण प्रयत्नों के फलस्वरूप अनेक नए समुद्री मार्गों एवं देशों की खोज हुई। इस समय हल्के जहाज बनने लगे तथा नाविकों को प्रशिक्षित करने के लिए स्कूल खोले गए। कम्पास के आविष्कार से समुद्री यात्रा सुरक्षित और सुगम हो गई। नई जगहो की खोज से वहाँ बस्तियां बसाई गई यानी उपनिवेश स्थापित हुआ। व्यापार-वाणिज्यिक का विकास हुआ तथा वाणिज्यवाद को प्रोत्साहन मिला। समुद्री मार्ग की खोजों ने पश्चिमी यूरोपीय देशों में व्यापारिक क्रान्ति का जन्म दिया। लोग पूँजीपति बनने लगे इससे पूँजीवाद को बल मिला।

संयुक्त पूंजी कंपनियों की स्थापना

15 वीं 16 वीं शताब्दियों में व्यापारी अधिक मुनाफा कमाने के लिए मिलकर व्यवसाय करने लगे। समुद्र व्यापार जोखिम भरा होता था, विशाल पूंजी का सौदा था किसी एक व्यापारी के लिए यह कठिन कार्य था। इस बीच यूरोप में संयुक्त पूंजी कंपनियों का उदय हुआ जो व्यवसायी ऐसी कंपनियों में पूंजी लगाता था उसे अपनी पूंजी के अनुरूप शेयर मिलता था।

विश्व में पहली संयुक्त कंपनी 15 वीं शताब्दी में जर्मन एवं इटली में स्थापित की गई थी। जिन्होंने कुछ खास क्षेत्रों में व्यापार करने का अधिकार दिया जाता था। और इस तरह की कंपनियों की वजह से पूँजीवाद के विकास को बल मिला।

आधुनिक बैंकिंग प्रणाली का विकास

आधुनिक बैंको ने पूँजीवाद के उदय एवं विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 15 वीं -16 वीं शताब्दी में अनेक बैंक स्थापित हुए। अब पूँजीपति अपना अतिरिक्त धन बैंको में सुरक्षित रखने लगे, जरूरत पड़ने पर बैंको से ब्याज पर ऋण भी ले सकते थे। इन बैंको से व्यवसायियों की जरूरते को पूरा करके पूँजीवादी व्यवस्था को मजबूती प्रदान की।

इसके साथ ही लोगों को अब बीमा जेसी सुविधा भी मिलने लगी। पहले लोगों को समुद्री व्यापार करते समय कई सामग्रियां या कभी-कभी जहाजों डूब जाते थे, जिससे व्यपरियों का काफी नुकसान हो जाता था। पर अब बीमा कंपनियां माल की क्षतिपूर्ति करती थी।

हिसाब किताब रखने की विधि में सुधार

15 वीं सदी तक यूरोप में व्यापार संबंधी हिसाब किताब रखने की विधि दोषपूर्ण थी। 15 वीं सदी के बाद ज्ञान के विकास के साथ हिसाब-किताब पर रखने की नई विधि प्रचलित हुई। अब दैनिक राजिस्टर तथा बहीखाता दोनों में ही व्यापार संबंधी आंकड़ों का विवरण विभिन्न खानों में दर्ज किया जाने लगा। इस नई विधि से व्यापार एवं वाणिज्य का हिसाब किताब रखना सरल हो गया।

निष्कर्ष

इस प्रकार उपरोक्त कथनों से हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि समांतवादी व्यवस्था के पतन में पूँजीवाद का विकास मे पृष्ठभूमि के निर्माण किया। इसके पश्चात भौगोलिक खोजो, उपनिवेशीकरण, शहरीकरण एवं तकनीकी विकास आदि ने मिलकर इसका बढ़ावा दिया। पूँजीवाद के निर्माण में ब्रिटेन अग्रणी राहा क्योंकि इसकी भौतिक दशा एवं शासकों के संरक्षणों में वहाँ पूंजी का तेजी से विकास हुआ। पूँजीवाद में समाज दो वर्गों में विभाजित हुआ। इसके बाद वर्ग संघर्ष प्रारंभ हुआ।