शांग राजवंश प्राचीन चीन में लगभग 1786 ईसा पूर्व से 122 ईसा पूर्व तक राज़ करने वाला राजवंश था। इस राजवंश ने चीन की सभ्यता में कई योगदान दिये- लेखन का आविष्कार, युद्ध में रथ और कांस्य हथियारों का इस्तेमाल, योजनाबद्ध तरीकों से खेती, समय का मापदंड आदि। इस राजवंश की जानकारी अधिकतर ह्वाग-हो नदी (पीली नदी) के पास अन्यांग नाम की जगह खुदाई से प्राप्त औजारो, शीलालेखों से होती है।
कुछ इतिहासकारों के अनुसार लगभग 1400 से 1320 ईसा पूर्व में पान-किंग(Pan-Keng) नाम का एक राजा अपनी राजधानी अन्यांग नामक शहर में बनाई थी। यह शहर ह्वाग-हो नदी के किनारे बनाया गया था, इस नगर को शांग लोगों का महानगर ( The Great City of Shang ) कहा गया। अन्यांग शहर से जिस राज्य पर शासन होता था उसे शांग राजवंश का राज्य कहा जाता था। शांग राजवंश के राजाओं को शत्रुओं के आक्रमण के कारण अपनी राजधानी पांच बार बदलनी पड़ी थी। अन्यांग शहर इनका अंतिम राजधानी था।
शांग राजवंश के शासन से पहले शिया राजवंश का शासन था। ये लोग पथरो को औज़ारों के रूप में प्रयोग करते थे, और यह खानाबदोश थे। शांग राजवंश ने इन पर विजय प्राप्त कर इनको अपना दास बना लिया था, इन लोगों से ही नगर निर्माण कार्य में काफी सहायता ली होगी।
शांग राजवंश के समय नगरों का अत्यधिक विकास हो चुका था। वे अपने घर मिट्टी का बनाते थे और दीवारों को रंगकर सजाएँ करते थे। घर क बीच में एक बड़े आंगन हुआ करता था, घरों के निर्माण में अत्यधिक लकड़ियों का उपयोग किया जाता था। शांग युग में ईंटों का प्रयोग नहीं होता था, खुदाई में एक बड़ा सा कमरा मिला है जिसकी लंबाई चौड़ाई 92x29 फुट है। घरों के आंगन में कब्र भी पाई गई है, कब्ररों की रंगाई भी की जाती थी। शांग राजवंश के समय दास और नौकरों के लिए घर जमीन के अंदर गड्ढो में बनाया जाता था, जिसकीकी ऊँचाई करीब छह से सात फुट तथा इनका ब्यास 10 फुट होता था। इस समय बहुत से झोपड़ियां भी पाई जाती थी संभवतः मध्यम वर्ग के लोग इन झोपड़ियों में रहते होंगे।
खुदाई से यह भी पता चलता है कि शांग युग के राजा और कुलीन अपनी बहुमूल्य वस्तुओं गड्ढा खोदकर जमीन में रखा करते थे। ऐसा एक खाई खुदाई में मिली है, जिनमें 5801 वस्तुएं प्राप्त हुई हैं जिनमें अच्छे बर्तन, हड्डियॉ, कछुवे की खोपड़ी, कांसा, सोना आदि मिले हैं।
शांग युग में नगरों की रक्षा के लिए एक दिशा में मिट्टी की दीवार बनाई गई थी, बाकी तीनों ओर से ह्वाग-हो नदी बहती थी। संभवतः यह दीवार सुरक्षा की दृष्टि से बनाई गई होगी। 193 ईस्वी में हुआंग नदी से कछुए की खोपड़ी पर कुछ लेख प्राप्त हुए हैं, इन लेखों को"ओरेकल बोन" कहा जाता है। इस लेखों से हमें शांग वंस के अत्यधिक जानकारी प्राप्त होती हैं।
चीन के इतिहास में शांग वंश का इतिहास काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। चीन के ह्वाग-हो नदी के पास अन्यांग नामक संस्थान पर खुदाई से बहुत सारी सामग्री प्राप्त हुई है, जिससे हमे शांग वंश के इतिहास का ज्ञान होता है। इस खुदाई से प्राप्त अवशेष के अनवेशन से उस समय की धार्मिक एवं आर्थिक स्थिति का ज्ञान होता है, इस युग की आर्थिक एवं धार्मिक स्थिति का संक्षिप्त विवेचना निम्नलिखित है-
शांग वंश के लोग मुख्य रूप से अपनी जीविका के लिए खेती पर निर्भर रहते थे। ये लोग घरेलू जानवर भी पालते थे एवं ये लोग शिकार भी किया करते थे। इनके शिकार के कई उद्देश्य थे शिकार से इन लोगों को भोजन, मनोरंजन, कुछ पहनने का सामान तथा सेना को लड़ने का अभ्यास आदि कार्य एक साथ हो जाता था। इसकी पुष्टि ओरेकल बोन से प्राप्त लेखों से होती है।
इस काल में कई जानवर पाले जाते थे, कुत्ते, सुअर, भेड़, बकरी, बैल एवं बंदर। घोड़े एवं हाथी को लेकर विद्वानों में मतभेद हैं परंतु इस काल में हाथी के हड्डियों पर उकेरे लेख मिले हैं, जिससे इस बात की पुष्टि होती है कि इस काल में हाथी भी पाले जाते थे। क्रील के अनुसार लोग घोड़े भी पालते थे जिसका प्रयोग रथो को हांकने के लिए किया जाता था। इस समय अधिकतर मात्रा में रथ पाए गए हैं। इस काल में भोजन के लिए जिन जानवरों को उपयोग होता था उनमें गाय, कुत्ते, भेड़, बकरी, सुअर आदि थे। कुत्ता एवं सुअर बड़े चाव से खाया जाता था, बड़ी संख्या में दूध देने वाली जानवर पाली जाती थी।
कुछ विद्वानों के अनुसार शांग युग में चारागाह काफी संख्या में थी। कुछ ओरेकल बोन के लेखों पर चारागाह से संबंध झगड़ों का भी उल्लेख है। इस आधार पर कुछ विद्वान् ने यह मान लिया था कि इस युग में लोग खानाबदोश थे, जिन्होंने हाल ही में खेती करना सीखा था। लेकिन प्रोफ़ेसर क्रील इस मत को नहीं मानते उनका कहना है- इस युग में चीनी कृषक थे, जो घर बना कर गांव और शहरों में रहा करते थे और काफी संख्या में पालतू जानवर रखते थे। और उनका यह भी मानना है कि चीनीयों के अधिकांश पूर्वज किसी भी समय में मवेशियों को लेकर घूमने वाले खानाबदोश नहीं थे बल्कि शुरू से ही घर बनाकर रहते थे।
शांग युग के लोगों के जीविका का प्रमुख साधन खेती थी, ये बहुत योजनाबद्ध तरीकों से खेती किया करते थे। ये लोग बसंत ऋतु के दूसरे या तीसरे महीने में पूजा-पाठ के द्वारा यह निश्चित करते थे कि इस बार कौन सी फसल बोएंगे। इस समय ये लोग अपने पूर्वजों की विशिष्ट पूजा करते थे और उनसे प्रार्थना करते थे कि उनकी फसल अच्छी हो और पूजा के बाद ही फसल बोई जाती थी। उनका मानना था कि पूर्वज व पितरों (देवता) उनके फसल को अच्छी और प्रचुर मात्रा में फसल उपज करने में मदद करते हैं।
इस काल में गेहूं, बाजरा, जौ आदि की खेती मुख्य रूप से की जाती थी, लेकिन चावल के विषय में विद्वानों में मतभेद हैं। इस युग में उतरी चीनी क्षेत्र की जलवायु चावल की खेती की लाइट थी और जमीन भी उपयुक्त थी। इसलिए ये लोग संभवतः चावल की खेती किया करते थे। बाजरे से ये लोग एक प्रकार का पेय पदार्थ बनाते थे।
इस काल के लोग कपड़े बनाने के पौधों को भी उगाना जानते थे। पुरात्ववेता के अनुसार नवपसान युग से ही उत्तरी चीन में कई ऐसे पौधे उगाया जाता था, जिनसे कपड़े बनाए जाते थे। संभवत: यह पौधा एक प्रकार का सन(Jute) था, जिसके रेसो से कपड़े बनाए जाते थे।
खेती काम अधिकतर पुरुष किया करते थे, लेकिन कुछ पौधों को स्त्रियाँ भी करती थी। संभवतः कपड़े बनाने वाले पौधों को उगाती थी, जिसमें रेशम तथा सन था। खेती के लिए जिन औज़ारों का प्रयोग करते थे वे संभवतः लकड़ी के बने होते थे। खेती के लिए जिन जानवरों का उपयोग लिया जाता था, उनमें बैल एवं गद्हा थे, इनसे वे खेत की जुताई करते थे।
शांग युग में आर्थिक समृद्धि के तीन साधन थे- कृषि, पशुपालन और शिकार करना। इन तीनों के साथ यूद्ध को भी जोड़ सकते हैं, युद्ध के साथ काफी लूट का माल आता था। शांग युग में थोड़ा वाणिज्य-व्यापार भी होता था, गाय, घोड़े और अनाज विनिमय के साधन माने जाते थे। संभवत: नागरों के बीच यह व्यापार होता था, इस समय केंद्रीय राजनीतिक सत्ता का अभाव था। इस युग में संभवतः कौड़ियों का प्रयोग सिक्कों की तरह होता था। 163 कौड़िया पाई गई है जो काफी बेशकीमती किस्म के हैं, इस वंश के समय पुरस्कार के रूप में कौड़िया दिया जाता था। जो संभवत: आज भी चीन में पुरस्कार के रूप में जो शब्द मिलता है उसमें "कौड़ी" का चित्र बना होता हैं।
शांग युग के लोग छपाई एवं बटन बनाने की कला में माहिर थे। छपाई के अलावा ये लोग चटाई और टोकरी बनाने भी जानते थे। इन लोगों को पॉलिश करने का भी ज्ञान था क्योंकि अन्यांन शहर के लोग पॉलिश की हुई कुल्हाड़ियों का प्रयोग करते थे। शांग लोग को पत्थर के कंगन और अंगूठी भी बनाने जानते थे, ये लोग मिट्टी के सुन्दर-सुन्दर बर्तन एवं दीवारें पर रंगों की डिजाइन बनाने अच्छी तरह जानते थे। इनकी बनाई हुई सामानों को एक जगह से दूसरी जगह भी ले जाया जाता था, इससे यह पुष्टि होती है कि व्यापार एक शहर से दूसरे शहरों में भी होता था परंतु सिक्कों के अभाव की वजह से उनतीशील व्यापार होना संभव नहीं हैं।
शांग युग में धर्म का मुख्य रूप पितरो और पूर्वजों की पूजा से संबंध था। प्राचीन चीन में पूर्वजों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान था, उनको मृत व्यक्ति न मानकर शक्तिशाली देवता माना जाता था। ऐसा विश्वास किया जाता था कि मरने के बाद पूर्वज के हाथों में आशिम शक्ति आ जाती है, ऐसा भी माना जाता था कि लड़ाई तथा अन्य कार्यों में सफलता या विफलता पूर्वजों की कृपा दृष्टि पर निर्भर करती थी और अप्रसंन होने पर ये पूर्वज अकाल, पराजय, बिमारी और मौत भेजकर दण्ड देते हैं। यह मानना गलत होगा कि शांग युग के निवासी अपने पूर्वजों को केवल भय या आतंक की दृष्टि से देखते हैं वास्तव में अपने पूर्वजों के प्रति गहरी निष्ठा और भक्ति रखते थे। घर में बड़े बुजुर्गों को मरने पर वास्तविक और गहरा शोक व्यक्त किया जाता था।
अन्यांग के पास शांग युग के 300 कब्रों की खुदाई हुई। इस खुदाई से उन लोगों के शव-संस्कार की प्रक्रिया का पता चलता है। इनकी शव-संस्कार के बारे में एक विचित्र बात देखने को मिलती है, ये लोग मुरदों को मुँह के बल सुलाया करते थे। किसी भी कब्र में शवपेटीका नहीं पाई गई है, इससे यह अंदाजा लगाया जाता है कि शव को दफनाने से पहले चटाई मे लपेटा जाता था। शव के साथ ये लोग कांसे के सामान भी गाड़ दिए जाते थे एवं मृतक के हैसियत अनुसार कब्र में वस्तुएं भी रखी जाती थी। बहुत से कब्रों में कांसे के बनी हुई कटारी नुमा कुल्हाड़ी एवं कुछ मिट्टी के बर्तन मिले हैं। धनी लोगों के कब्रों में कांस्य की सुन्दर-सुन्दर बर्तन भी रखे जाते थे।
राजाओं की कब्र में बहुत बहुमूल्य पदार्थ रखे जाते थे और इन कब्रों की रंगाई भी किया जाता था। दुर्भाग्यवस राजाओं के कब्रों से वस्तुएं चुरा भी लिया जाता था। राजाओं के शव-संस्कार के समय बहुत से मनुष्यों को बलिदान भी चढाया जाता था। ऐसा विश्वास किया जाता था कि मरे हुए पूर्वज अंतरिक्ष में निवास करते हैं और उन्हें लोगों की आवश्यकता पड़ती होगी। ओरेकल बोन के लेखों से यह पता चलता है कि शांग युग के लोग अपने पूर्वजों से सहायता मांगते थे और उनको उतना ही बलिदान देते थे। मृत रानियों को भी पूजा और बलिदान चढ़ाए जाते थे, उनका मानना था कि स्त्रियों को संतान स्त्री पूर्वज की कृपा पर निर्भर माना जाता था।
पूर्वजों के अलावा इनमें कुछ प्रमुख देवता थे- सरदार-सर्व-स्त्री (Dragon Woman)। बाद में पहाड़ों और नदियों की पूजा होने लगी, इसके अलावा वायु देवता, सर्प देवता एवं टी (Ti) नामक दूसरा देवता होता था। उनका मानना था कि टी ने ही इस पृथ्वी का निर्माण किया।
शांग युग में चीनी कई तरीकों से देवताओं की इच्छा जानने की कोशिश करते थे, खासकर कछुए की हड्डियों पर लिखकर देवताओं से प्रार्थना किए जाते थे एवं जवाब के रूप में उन्हें स्वपन आता था।
शांग युग के लोग बलिदान को विशेष महत्त्व देते थे। उनका मानना था कि मृत व्यक्तियों को भी भोजन की आवश्यकता होती है। बलिदान देते समय बहुत से पेय पदार्थ(सराब) भी जमीन पर गिराए जाते थे। जानवरों को भी कभी-कभी जमीन में गाड़ दिया जाता था, जिन जानवरों को बलिदान दिया जाता था उनमें प्रमुख गाय, सुअर, बकरी, भेड़ आदि है कभी-कभी मुर्गों को भी चढ़ाया जाता था। कुछ लेखों से यह पता चलता है कि शांग युग के लोग मंदिरों में भी बलिदान चढ़ाएं करते थे।
शांग युग के लोग अधिकतर बलिदान बसंत ऋतु में फसलों की बुआई करते समय चढ़ाते थे। संभवत: उनका मानना था कि बलिदान से फसल अच्छे होगी, यह भी संभव है कि हेंमत ऋतु में भी फसल काटने के बाद भी कृतज्ञाता-ज्ञापन के रूप में बलिदान चढ़ाए जाते होंगें। एक बलिदान के समय 10 तक जानवर चढ़ाए जाते थे, कभी-कभी 50-100 या 200 जानवर का भी बलिदान चढ़ाया जाते थे।
इस प्रकार उपरोक्त अध्ययनों से हम पाते हैं कि चीन की इतिहास में शांग वंश का काल आर्थिक व धार्मिक दृष्टि से संपन्न एवं समृद्ध काल था। इस वंश के दौरान चीन में अद्भुत संस्कृतियों, गतिविधियाँ संचालित हुई। इसलिए ऐतिहासिक दृष्टि से चीनी सभ्यता के विकास में शांग वंश का काफी महत्त्व हैं।
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